कोरोना वायरस का डीएनए पहचानेगी मशीन, 20 मिनट में आएगी रिपोर्टब्रिटेन की साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसी पोर्टेबल मशीन और किट तैयार की है, जिसकी मदद से नाक से स्वैब लेकर 20 मिनट में ही वायरस के डीएनए की पहचान हो सकेगी।

ब्रिटेन की साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसी पोर्टेबल मशीन और किट तैयार की है, जिसकी मदद से नाक से स्वैब लेकर 20 मिनट में ही वायरस के डीएनए की पहचान हो सकेगी। अभी होने वाली स्वैब जांच का नतीजा आने में 12 से 24 घंटे का समय लगता है।
यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. जेरॉन न्यूवॉलैंड का कहना है कि चार साल पहले इस तरह की मशीन यूरिनरी ट्रैक्ट (यूटीआई) में होने वाले संक्रमण की जांच के लिए बनाई गई थी। अब इसी मशीन को अपग्रेड करने के साथ जांच किट तैयार की गई है, जिसके जरिए कोविड-19 की पहचान हो सकेगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस किट से शरीर में मौजूद वायरस के डीएनए को आसानी से पकड़ा जा सकता है।
पीसीआर टेस्ट जैसी ही जांच प्रक्रिया
ये जांच मौजूदा पीसीआर टेस्ट जैसी ही है। शोधकार्ताओं ने स्पष्ट किया है कि ये एंटीबॉडी टेस्ट नहीं है, जिससे ये पता किया जाता है कि शरीर में वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज बनी है या नहीं। मशीन में जो जांच किट इस्तेमाल होगी उसकी कीमत करीब 100 पाउंड (करीब 9400 रुपये) से कम होगी।
एक दिन में 1 लाख जांच संभव
वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनियाभर में कोरोना की जांच दर अभी इसलिए कम है क्योंकि जांच की प्रक्रिया जटिल है और रिपोर्ट आने में 12 से 24 घंटे का समय लगता है। इस किट के जरिए जांच की सुविधा शुरू होती है तो 80 फीसदी की तेजी आएगी। मतलब अगर पहले 20 हजार जांच होती थीं तो इस मशीन और किट के जरिए एक लाख लोगों की जांच एक दिन में हो सकेगी।
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ब्रिटेन की साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसी पोर्टेबल मशीन और किट तैयार की है, जिसकी मदद से नाक से स्वैब लेकर 20 मिनट में ही वायरस के डीएनए की पहचान हो सकेगी। अभी होने वाली स्वैब जांच का नतीजा आने में 12 से 24 घंटे का समय लगता है।
यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. जेरॉन न्यूवॉलैंड का कहना है कि चार साल पहले इस तरह की मशीन यूरिनरी ट्रैक्ट (यूटीआई) में होने वाले संक्रमण की जांच के लिए बनाई गई थी। अब इसी मशीन को अपग्रेड करने के साथ जांच किट तैयार की गई है, जिसके जरिए कोविड-19 की पहचान हो सकेगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस किट से शरीर में मौजूद वायरस के डीएनए को आसानी से पकड़ा जा सकता है।
पीसीआर टेस्ट जैसी ही जांच प्रक्रिया
ये जांच मौजूदा पीसीआर टेस्ट जैसी ही है। शोधकार्ताओं ने स्पष्ट किया है कि ये एंटीबॉडी टेस्ट नहीं है, जिससे ये पता किया जाता है कि शरीर में वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज बनी है या नहीं। मशीन में जो जांच किट इस्तेमाल होगी उसकी कीमत करीब 100 पाउंड (करीब 9400 रुपये) से कम होगी।
एक दिन में 1 लाख जांच संभव
वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनियाभर में कोरोना की जांच दर अभी इसलिए कम है क्योंकि जांच की प्रक्रिया जटिल है और रिपोर्ट आने में 12 से 24 घंटे का समय लगता है। इस किट के जरिए जांच की सुविधा शुरू होती है तो 80 फीसदी की तेजी आएगी। मतलब अगर पहले 20 हजार जांच होती थीं तो इस मशीन और किट के जरिए एक लाख लोगों की जांच एक दिन में हो सकेगी।
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